लिवर (यकृत) का कैंसर
Published on 24 Nov, 2024
FAQ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हमारा लिवर
लिवर (यकृत) हमारे शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। यह हमारे पेट के ऊपरी हिस्से में पसलियों के पीछे स्थित होता है। लिवर हेपेटोसाइट्स नाम की कोशिकाओं से बना होता है। यकृत में कई अन्य विशेष कोशिकाएं भी होती हैं। यह पाचन के लिए पित्त का उत्पादन करता है। लिवर में पित्त नलिकाओं का एक नेटवर्क पित्त को इकट्ठा करता है और आंत में ले जाता है।
लिवर एक महत्वपूर्ण अंग है और इसके कई महत्वपूर्ण कार्य हैं:
- रक्त से विषाक्त पदार्थों को निकालना
- रक्त का थक्का बनाने वाले कारक उत्पन्न करना
- शरीर में ग्लूकोज़ का सामान्य स्तर बनाए रखना
- आँतों द्वारा अवशोषित पोषक तत्वों का भंडारण और प्रसंस्करण
लिवर की गांठें
जब एक स्वस्थ कोशिका लगातार विभाजित होने और बढ़ने की क्षमता प्राप्त कर लेती है, तो वह कैंसरग्रस्त हो जाती है। फिर यह एक गाँठ बन जाती है जो आकार में बढ़ती जाती है और फिर शरीर के अन्य अंगों में फैल जाती है। लिवर में विभिन्न प्रकार की कोशिकाएं कई प्रकार के ट्यूमर बना सकती हैं। इनमें से कुछ गैर-कैंसर वाले होते हैं और कुछ कैंसर होते हैं।
कैंसर लिवर में शुरू हो सकता है, या फिर अन्य अंगों में पैदा होकर लिवर में आ सकता है। लिवर में शुरू होने वाला कैंसर प्राथमिक लिवर कैंसर होता है जबकि अन्य अंगों से लिवर में फैलने वाला कैंसर द्वितीयक लिवर कैंसर या मेटास्टेटिक कैंसर होता है।
प्राथमिक लिवर कैंसर
प्राथमिक लिवर कैंसर के कई प्रकार हैं:
हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर)
इंट्राहेपेटिक पित्त नली कैंसर या कोलेंजियोकार्सिनोमा
एंजियोसारकोमा: एंजियोसारकोमा दुर्लभ कैंसर हैं। वे यकृत की रक्त वाहिकाओं की कोशिकाओं में शुरू होते हैं।
हेपेटोब्लास्टोमा: यह बच्चों में होने वाला दुर्लभ कैंसर है।
द्वितीयक (मेटास्टेटिक) लिवर कैंसर
जब शरीर के किसी अन्य हिस्से से शुरू होने वाला कैंसर लिवर में फैलता है, तो इसे सेकेंडरी या मेटास्टेटिक लिवर कैंसर कहा जाता है।
मेटास्टेटिक यकृत कैंसर के प्राथमिक स्थलों में शामिल हैं:
- कोलोरेक्टल कैंसर
- स्तन कैंसर
- अग्नाशय का कैंसर
- गुर्दे का कैंसर
- फेफड़े का कैंसर
- आमाशय का कैंसर
- भोजन-नली का कैंसर
- पित्ताशय का कैंसर
- मेलेनोमा (त्वचा कैंसर)
हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर)
हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC) यकृत कोशिकाओं (हेपेटोसाइट्स) का कैंसर है। यह आमतौर पर पहले से ख़राब लिवर (यकृत सिरोसिस) वाले लोगों में होता है। वैश्विक स्तर पर, यकृत कैंसर कैंसर का पांचवा सबसे आम प्रकार है और कैंसर से होने वाली मृत्यु का तीसरा सबसे आम कारण है। यह पुरुषों में तीन गुना अधिक आम है।
लिवर कैंसर के कारण और जोखिम कारक (risk factors)
जोखिम कारक वह होता है जो किसी व्यक्ति में कैंसर होने की संभावना को बढ़ाता है।
निम्नलिखित कारण किसी व्यक्ति में लिवर कैंसर होने के जोखिम को बढ़ाते हैं:
- अधिक आयु
- लिंग: हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा पुरुषों में अधिक आम है
- लिवर सिरोसिस
- मोटापा और फैटी लिवर (NASH)
- वायरल हेपेटाइटिस (HBV और HCV)
- प्राथमिक पित्त सिरोसिस
- हेमोक्रोमैटोसिस
- शराब और तंबाकू का दुरुपयोग
- मधुमेह
- विषाक्त पदार्थ और रसायन
- एनाबोलिक स्टेरॉयड
लिवर कैंसर के संकेत और लक्षण
प्रारंभिक अवस्था में हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा के सामान्यतः कोई लक्षण नहीं दिखाई देते।
जब लक्षण प्रकट होते हैं, तो उनमें शामिल हैं:
- पीलिया (आंखें, त्वचा और मूत्र का पीला होना)
- दर्द, विशेष रूप से पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में
- वजन कम होना
- भूख न लगना
- मतली और उल्टी
- पेट में गांठ
- लगातार कमजोरी या थकान महसूस करना
ध्यान दें कि इनमें से कई लक्षण कैंसर के अलावा अन्य मामूली बीमारियों में भी हो सकते हैं।
लिवर कैंसर की जांच एवं परीक्षण (डायग्नोसिस)
स्वास्थ्य और रक्त परीक्षण: एक चिकित्सक द्वारा लक्षणों को समझना और संकेतों की जांच करना बीमारी तक पहुंचने के लिए जरूरी है।
ट्यूमर मार्कर: रक्त में अल्फा-फेटोप्रोटीन (AFP) नामक मार्कर की जांच की जाएगी। लिवर कैंसर वाले 50% से 70% रोगियों में AFP अधिक होगा।
इमेजिंग टेस्ट्स: अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन, PET स्कैन, MRI
बायोप्सी: बायोप्सी का अर्थ है कि ट्यूमर के एक छोटे से हिस्से का नमूना लेना और माइक्रोस्कोप के द्वारा इसकी जांच करना।
लिवर कैंसर का प्रसार (चरण) निर्धारित करना (स्टेजिंग)
कैंसर की गांठ से कैंसर कोशिकाएं निकलती है और शरीर में तीन प्रकार से फैलती हैं;
- रक्त के माध्यम से
- लिंफेटिक के माध्यम से
- सीधे आसपास के उत्तकों में
कैंसर का फैलाव स्थानीय या दूरवर्ती (मेटास्टैसिस) हो सकता है।
मोटे तौर पर हम कैंसर को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं:
- स्थानीय - कैंसर उस अंग तक सीमित है।
- स्थानीय प्रसार - कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स में फैल गया है।
- दूर तक फैला हुआ - कैंसर दूर के अंगों तक फैल गया है।
TNM (ट्यूमर, नोड और मेटास्टेसिस) वर्गीकरण
यह वर्गीकरण अमेरिकन जॉइंट कमेटी ऑन कैंसर (AJCC) द्वारा विकसित किया गया है।
ट्यूमर (T): ट्यूमर का आकार क्या है? कितने ट्यूमर हैं? क्या यह आस-पास की रक्त वाहिकाओं में जा रहा है?
पास के लिम्फ नोड्स (N): क्या कैंसर पास के लिम्फ नोड्स में फैल गया है?
दूर के अंगों तक फैला हुआ (M): क्या कैंसर दूर के अंगों में फैल गया है?
चरण I से III तक स्थानीयकृत रोग होता है और चरण IV फैला हुआ कैंसर है।
बार्सिलोना क्लिनिक लिवर कैंसर सिस्टम (BCLC)
बीसीएलसी प्रणाली ट्यूमर के आकार, विस्तार और लिवर की कार्यात्मक स्थिति के आधार पर लिवर कैंसर के रोगियों को वर्गीकृत करती है।
लिवर कैंसर का उपचार
लिवर कैंसर का उपचार लिवर की स्थिति, कैंसर के चरण और मरीज के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। शुरुआती ट्यूमर में उपचार का उद्देश्य कैंसर को खत्म करना और रोगी को ठीक करना होता है। उन्नत अवस्था में उपचार का उद्देश्य ट्यूमर की वृद्धि को धीमा करना, लक्षणों से राहत देना और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना होता है।
लिवर कैंसर के लिए सर्जरी
यदि ऑपरेशन संभव हो तो लिवर कैंसर के लिए यह सबसे प्रभावी उपचार है।
हेपेटेक्टोमी या लिवर रिसेक्शन: लिवर के कैंसर वाले हिस्से को स्वस्थ मार्जिन के साथ हटाया जाता है।
लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रांसप्लांट): लिवर सिरोसिस वाले मरीज़ों में लिवर प्रत्यारोपण एक विकल्प है।
एब्लेशन
एब्लेशन में ट्यूमर कोशिकाओं को मारने के लिए अत्यधिक गर्मी, ठंड या रसायन का उपयोग किया जाता है। इसमें शामिल हैं:
- रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA)
- माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA)
- क्रायोएब्लेशन
- परक्यूटीनियस इथेनॉल इंजेक्शन (PEI)
विकिरण चिकित्सा (रेडियोथेरेपी)
विकिरण चिकित्सा में ट्यूमर कोशिकाओं को मारने के लिए उच्च ऊर्जा वाले एक्स-रे का उपयोग किया जाता है। स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (SBRT) ट्यूमर को विकिरण की ज्यादा खुराक देने की एक तकनीक है।
एम्बोलिज़ेशन थेरेपी
ट्रांस-आर्टेरियल कीमोएम्बोलाइज़ेशन (TACE) या ट्रांस-आर्टेरियल रेडियोएम्बोलाइज़ेशन (TARE)
एम्बोलाइज़ेशन का मतलब है ट्यूमर की रक्त आपूर्ति को रोकना। इस दौरान कीमोथेरेप्यूटिक एजेंट और रेडियोधर्मी बीड्स को भी सीधे ट्यूमर में पहुंचाया जा सकता है।
टार्गेटेड थेरेपी (Targeted therapy)
पदार्थ जो सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाए बिना कैंसर कोशिकाओं की पहचान करते हैं और उन पर लक्ष्य करते हैं।
इम्मुनोथेरपी (Immunotherapy)
यह कैंसर से लड़ने के लिए रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) का उपयोग करता है।
लिवर कैंसर का निदान (Prognosis) / सर्वाइवल रेट्स
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, लिवर कैंसर का पता चलने के बाद कम से कम पांच साल तक जीवित रहने वाले लोगों का प्रतिशत:
- स्थानीय कैंसर: 37.3%
- क्षेत्रीय स्तर पर फैलने वाले कैंसर: 13%
- दूर तक फैले कैंसर: 3.3%
लिवर कैंसर की स्क्रीनिंग
लिवर कैंसर की जांच उन रोगियों में की जाती है जिन्हें सिरोसिस और वायरल हेपेटाइटिस जैसी बीमारी होती है। जांच के विकल्पों में अल्फा फीटोप्रोटीन (AFP) के लिए रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन या MRI शामिल हैं।
लिवर कैंसर के जोखिम को कैसे कम करें?
हम लिवर कैंसर के विकास के जोखिम को कम कर सकते हैं:
- धूम्रपान और शराब का सेवन न करें
- हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं
- यदि आपको हेपेटाइटिस है, तो इलाज कराएं
- नियमित व्यायाम, स्वस्थ आहार और आदर्श वजन बनाए रखें
- यदि आपको जोखिम है तो नियमित रूप से लिवर कैंसर की जांच (स्क्रीनिंग) करवाएं
सतर्क रहें! स्वस्थ रहें!


