पित्त नली का कैंसर: लक्षण, कारण और इलाजBile duct cancer (Cholangiocarcinoma) in Hindi

पित्त नली का कैंसर (bile duct cancer) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर है जो पित्त नली में शुरू होता है। पित्त नली वे पतली नलिकाएं हैं जो लिवर में बने पित्त (bile) को आंत तक पहुंचाती हैं। इस कैंसर को चोलांजियोकार्सिनोमा (Cholangiocarcinoma) भी कहा जाता है। यह लेख आपको पित्त नली के कैंसर के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में सरल हिंदी में पूरी जानकारी देगा।
पित्त नली (Bile Duct) क्या है?
पित्त नली एक पतली ट्यूबों का जाल है, जो लिवर में बने पित्त को इकट्ठा करके आंत (intestine) तक पहुंचाती है। पित्त (bile) लिवर द्वारा बनाया गया एक पाचक रस है, जो आंत में वसा (fat) के पाचन में मदद करता है।
पित्त नली पेड़ जैसी संरचना होती है, जिसकी कई शाखाएं लिवर के अंदर होती हैं। ये शाखाएं मिलकर दाहिनी और बाईं हेपेटिक डक्ट बनाती हैं, जो लिवर के दाहिने और बाएं लोब से पित्त को बाहर निकालती हैं। ये दोनों नलिकाएं जहां मिलती हैं, उसे हाइलम (hilum) या कन्फ्लुएंस कहते हैं। यहीं से कॉमन बाइल डक्ट (common bile duct) शुरू होता है। पित्ताशय (gallbladder) भी सिस्टिक डक्ट के माध्यम से इसी से जुड़ा होता है। नीचे जाकर यह नली अग्नाशय (pancreas) की नली से मिलती है और आंत में खुल जाती है।
पित्त नली में बनने वाले कैंसर को चोलांजियोकार्सिनोमा (Cholangiocarcinoma) कहा जाता है। यह कैंसर पित्त नली की दीवार में शुरू होता है, फिर बढ़ता है और आस-पास के अंगों में फैल सकता है।
पित्त नली के कैंसर के प्रकार
पित्त नली का कैंसर तीन प्रकार का होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर पित्त नली के किस हिस्से से शुरू हुआ है:
अंतर्यकृत पित्त नली का कैंसर (Intrahepatic cholangiocarcinoma): यह कैंसर लिवर के अंदर मौजूद पित्त नलिकाओं में शुरू होता है। शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखते और अक्सर यह पेट के कैंसर की जांच में पकड़ में आता है।
पेरीहाइलर पित्त नली का कैंसर (Perihilar cholangiocarcinoma): यह कैंसर हाइलम या कन्फ्लुएंस यानी उस जगह से शुरू होता है जहां दाहिनी और बाईं हेपेटिक डक्ट मिलकर एक नली बनाती हैं। इसे हाइलर कोलेंजियोकार्सिनोमा या क्लाट्स्किन ट्यूमर (Klatskin tumour) भी कहा जाता है।
दूरस्थ पित्त नली का कैंसर (Distal cholangiocarcinoma): यह कैंसर उस हिस्से में होता है जहां पित्त नली आंत में खुलने वाली होती है और जो अग्नाशय के सिर से होकर गुजरती है।
पेरीहाइल और दूरस्थ पित्त नली के कैंसर को मिलाकर बाहरी (extrahepatic) पित्त नली का कैंसर कहा जाता है, क्योंकि ये लिवर के बाहर स्थित होती हैं।
पित्त नली के कैंसर के कारण और जोखिम कारक
जो कोई भी चीज किसी बीमारी की संभावना को बढ़ाती है, उसे जोखिम कारक (risk factor) कहते हैं। जोखिम कारक बीमारी की गारंटी नहीं देता — कुछ लोगों में कई जोखिम कारक होने के बावजूद कैंसर नहीं होता, जबकि कुछ लोगों को बिना किसी जोखिम कारक के भी कैंसर हो जाता है।
पित्त नली के कैंसर के प्रमुख कारण और जोखिम कारक हैं:
- प्राइमरी स्क्लेरोसिंग कोलेंजाइटिस (PSC) — एक ऐसी बीमारी जिसमें पित्त नलिकाएं धीरे-धीरे सिकुड़कर अवरुद्ध हो जाती हैं
- अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रॉन रोग (बड़ी आंत की सूजन)
- पित्त नली की सिस्ट (चोलेडोकल सिस्ट; choledochal cyst)
- लिवर फ्लूक (liver fluke) नामक परजीवी का संक्रमण
- सिरोसिस (liver cirrhosis) और वायरल हेपेटाइटिस (हेपेटाइटिस B और C)
- हेपाटोलिथियासिस (लिवर की पथरी) और पित्त नली की पथरी
- थोरोट्रास्ट जैसे कुछ विषैले पदार्थों (toxins) के संपर्क में आना
- धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन
- मधुमेह (diabetes) और मोटापा
पित्त नली के कैंसर के लक्षण
लक्षण और संकेत शरीर के वे तरीके हैं जिनसे वह बताता है कि कुछ गड़बड़ है। पित्त नली के कैंसर के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। शुरुआती चरण में यह कैंसर अक्सर लक्षणहीन रहता है, इसलिए देर से पता चलना आम बात है।
पित्त नली के कैंसर के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- पीलिया (जंड) — आंखें, त्वचा और मूत्र का पीला होना
- पेट में दर्द (ऊपरी पेट में)
- बुखार और ठंड लगना
- त्वचा में खुजली (itching)
- वजन कम होना और भूख न लगना
- गाढ़ा पीला मूत्र और हल्के रंग का मल
- थकान और कमजोरी महसूस होना
ध्यान दें कि इनमें से कई लक्षण पित्त नली के कैंसर के अलावा पित्त की पथरी, संक्रमण या अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण लगातार बने रहे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
पित्त नली के कैंसर की जांच (डायग्नोसिस)
लक्षणों और शारीरिक जांच के आधार पर जब कैंसर का संदेह होता है, तो बीमारी की पुष्टि और उसके चरण (stage) का पता लगाने के लिए निम्नलिखित जांच की जाती हैं:
रक्त परीक्षण और लिवर फंक्शन टेस्ट
सामान्य रक्त जांच और लिवर फंक्शन टेस्ट से लिवर और पित्त नली की कार्यशीलता का पता चलता है। पीलिया होने पर ये टेस्ट विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
ट्यूमर मार्कर
ये वे पदार्थ हैं जिनका स्तर कुछ विशेष कैंसरों में रक्त में बढ़ सकता है। पित्त नली के कैंसर में CA 19-9 और CEA (carcinoembryonic antigen) बढ़े हुए पाए जा सकते हैं। ये अकेले निदान के लिए पर्याप्त नहीं होते, पर बीमारी पर नज़र रखने में सहायक हैं।
अल्ट्रासाउंड
यह लिवर और पित्त नली को देखने की एक बुनियादी और सुरक्षित जांच है। इससे पित्त नली का फैलाव और लिवर में कोई गांठ दिख सकती है।
सीटी स्कैन (CT)
इस जांच में रोगी को सीटी स्कैनर में रखा जाता है और एक्स-रे की किरणों से अंदरूनी अंगों की छवियां बनती हैं। पतले कटों वाला ट्रिपल-फेज CT कैंसर और प्रभावित अंगों की सटीक जानकारी देता है।
एमआरआई और MRCP
एमआरआई में शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों से अंदरूनी अंगों की छवियां बनती हैं। MRCP पित्त नली की बहुत स्पष्ट और विस्तृत तस्वीर देता है, इसलिए पित्त नली के कैंसर में यह सबसे उपयोगी जांचों में से एक है।
पीईटी स्कैन (PET)
यह एक फंक्शनल इमेजिंग जांच है, जिसमें रेडियोएक्टिव ग्लूकोज का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं की गतिविधि देखी जाती है। कभी-कभी बीमारी के चरण निर्धारण के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
बायोप्सी
इस प्रक्रिया में ट्यूमर का एक छोटा सा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप में जांची जाती है, जिससे कैंसर की पुष्टि होती है। जिन पित्त नली के कैंसर को सर्जरी से हटाया जा सकता है, उनमें अक्सर बायोप्सी की आवश्यकता नहीं होती।
पित्त नली के कैंसर की अवस्था (स्टेज)
स्टेजिंग से पता चलता है कि कैंसर कितना फैला है। सामान्य रूप से शुरुआती स्टेज में कैंसर पित्त नली तक सीमित रहता है, मध्यम स्टेज में यह आस-पास के लिवर, रक्त वाहिकाओं या लिम्फ नोड्स में फैल सकता है, और उन्नत स्टेज में यह दूरस्थ अंगों में फैल जाता है। इलाज का तरीका और उसके परिणाम मुख्य रूप से स्टेज पर ही निर्भर करते हैं।
पित्त नली के कैंसर का इलाज
यदि कैंसर उस चरण में पकड़ में आ जाए जब उसे सर्जरी से हटाया जा सकता है, तो ठीक होने की संभावना सबसे अधिक होती है। सर्जरी का तरीका कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।
सर्जरी (शल्य चिकित्सा)
अंतर्यकृत और पेरीहाइलर कोलेंजियोकार्सिनोमा में सर्जरी में लिवर के कुछ हिस्से को हटाना (हेपेटेक्टोमी) शामिल होता है। दूरस्थ पित्त नली के कैंसर में व्हिपल प्रोसीजर (Whipple procedure या pancreaticoduodenectomy) किया जाता है। साथ ही आस-पास के लिम्फ नोड्स भी हटाए जाते हैं।
कई बार पीलिया इतना अधिक होता है कि सीधे सर्जरी संभव नहीं होती। ऐसी स्थिति में सर्जरी से पहले पित्त को बाहर निकालकर पीलिया कम करना आवश्यक होता है। इसके लिए ERCP (एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड चोलांजियोपैंक्रियाटोग्राफी) या PTBD (परक्यूटेनियस ट्रांसहेपेटिक बाइलीड ड्रेनेज) नामक प्रक्रियाएं की जाती हैं। जिन मरीजों में कैंसर सर्जरी के लिए नहीं निकाला जा सकता, उनमें यही ड्रेनेज प्रक्रिया राहत (palliation) के लिए उपयोग होती है।
कीमोथेरेपी
कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है।
एडजुवेंट कीमोथेरेपी: सर्जरी के बाद बचे हुए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दी जाती है।
नीओएडजुवेंट कीमोथेरेपी: यदि ट्यूमर बहुत बड़ा हो, तो सर्जरी से पहले ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए दी जाती है।
पैलिएटिव कीमोथेरेपी: जब कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका हो, तो यह जीवन को लम्बा करती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती है।
विकिरण चिकित्सा (Radiation therapy)
विकिरण चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उच्च ऊर्जा एक्स-रे का उपयोग किया जाता है। सर्जरी के बाद शेष रह गए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या लक्षणों से राहत दिलाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी
टार्गेटेड थेरेपी: ये वे दवाएं हैं जो सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हीं पर हमला करती हैं।
इम्यूनोथेरेपी: यह उपचार रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) का उपयोग करके कैंसर से लड़ता है। इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर थेरेपी इसका एक प्रमुख प्रकार है।
पैलिएटिव (प्रशामक) उपचार
पैलिएटिव उपचार लक्षणों से राहत देता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। यह तब दिया जाता है जब ट्यूमर बहुत उन्नत या फैला हुआ हो, या फिर मरीज बड़ी सर्जरी के लिए फिट न हो।
पित्त नली के कैंसर का पूर्वानुमान (Prognosis)
पित्त नली का कैंसर एक गंभीर बीमारी है और इसका पूर्वानुमान मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी का पता किस चरण में चला, कैंसर किस प्रकार का है और उसे सर्जरी से पूरी तरह हटाया जा सका या नहीं। शुरुआती चरण में पता चलने और सर्जरी से पूरी तरह हटाए जाने पर ठीक होने की संभावना सबसे अधिक होती है। उन्नत चरण में उपचार का उद्देश्य लक्षणों से राहत, जीवन को लम्बा करना और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखना होता है।
बचाव और सावधानियां
पित्त नली के कैंसर को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियां जोखिम को कम करने में मदद करती हैं:
- पित्त की पथरी और पित्त नली की समस्याओं का समय पर इलाज कराएं
- हेपेटाइटिस B और C के लिए जांच कराएं और उचित उपचार लें
- धूम्रपान और शराब से परहेज करें
- संतुलित आहार लें, मोटापे और मधुमेह पर नियंत्रण रखें
- पीलिया, पेट दर्द या बिना कारण वजन घटने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें
सतर्क रहें! स्वस्थ रहें! और खुश रहें!
पित्त नली का कैंसर देर से पता चलने वाला कैंसर है, इसलिए लक्षणों के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है। पीलिया, पेट दर्द, खुजली या वजन घटने जैसे लक्षणों को गंभीरता से लें और समय पर जांच कराएं। शुरुआती पहचान और उचित उपचार से इस बीमारी के परिणामों को बेहतर बनाया जा सकता है।
अधिक जानकारी और व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क करें।


